शमी वृक्षसे सम्बन्धित विशेष तथ्य (भाग-१)


शमी वृक्षके गुण एवं महत्त्व :
शमीको भगवान गणेशका प्रिय वृक्ष माना जाता है और शिवके साथ उनकी पूजामें भी इसकी पत्तियां चढाई जाती हैं । इसमें भगवान शिवका वास भी माना गया है, जो श्रीगणेशके पिता हैं और मानसिक क्लेशोंसे मुक्ति देनेवाले महादेव हैं । यही कारण है कि शमीपत्रका चढावा श्रीगणेशकी प्रसन्नतासे बुद्धिको पवित्रकर मानसिक बल देनेवाला माना गया है । यदि आप भी अपने मन अथवा परिवारको शान्त एवं सुखी रखना चाहते हैं तो नीचे बताए विशेष मन्त्रसे श्रीगणेशको शमी पत्र अर्पित करें –

त्वत्प्रियाणि सुपुष्पाणि कोमलानि शुभानि वै ।
शमी दलानि हेरम्ब गृहाण गणनायक ॥

शमी, भगवान श्रीरामका भी प्रिय वृक्ष था और लंकापर आक्रमणसे पूर्व उन्होंने शमीवृक्षकी पूजाकर, उससे विजयी होनेका आशीर्वाद प्राप्त किया था; अतः आज भी कई स्थानोंपर ‘रावण दहन’के पश्चात घर लौटते समय स्वर्णके प्रतीक स्वरूप शमीके पत्ते एक दूसरेको बांटनेकी प्रथा है, इसके साथ ही कार्योंमें सफलता मिलनेकी कामनासे निम्नलिखित श्लोकद्वारा शमीकी वन्दनाकी जाती है ।
‘शमी शम्यते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी ।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी ॥
करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया ।
तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता ॥’

इसका अर्थ है, “हे शमी वृक्ष ! आप पापोंको नाश करनेवाले एवं दुश्मनोंको पराजित करनेवाले हैं । आपने ही शक्तिशाली अर्जुनका धनुष धारण किया था । साथ ही आप प्रभु श्रीरामके भी अतिप्रिय हैं । जिस प्रकार श्रीरामने आपकी पूजा की थी, हम भी कर रहे हैं । हमपर कृपाकर हमें सत्य एवं विजयके मार्गपर चलनेकी प्रेरणा दें । हमारे मार्गमें आनेवाली सभी बाधाओंको दूरकर हमें विजय दिलाएं ।” (क्रमश: )



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