जुलाई २१, २०१८
उत्तरप्रदेशकी प्रथम ‘महिला शरई न्यायालय’ अब निकाह, तलाक, हलाला और विरासत जैसे प्रकरणपर मुस्लिम महिलाओंसे परामर्श लेगी । यह भी जाननेका प्रयास करेगी कि विवादकी स्थितियोंमें उनमें इसे लेकर आक्रोश क्यों पैदा हो रहा है ? अपेक्षाके अनुरूप न्याय मिल रहा है या नहीं ? इसके पश्चात एक विस्तृत ब्यौरा तैयार किया जाएगा ।
‘मोहकम-ए-शरिया दारुल कजा ख्वातीन न्यायालय’ नामसे नगरके पटकापुरमें इसकी स्थापना हो चुकी है । अगले सप्ताह उद्घाटनके पश्चात इसका औपचारिक रूपसे आरम्भ हो जाएगा । इसकी स्थापना ‘ऑल इण्डिया ख्वातीन बोर्ड’ और ‘सरपरस्ती सुन्नी उलमा’ कर रही है । इनके परामर्शपर मुस्लिम महिलाओंकी सोचमें हो रहे बदलावको अब महिला दारुल कजा सर्वेसे जाननेका प्रयास करेगी ।
रविवारको उन महिलाओंको प्रशिक्षण दिया जाएगा जो दारुल कजाके लिए महिलाओंका परामर्श लेंगी । सर्वेक्षणकी रूपरेखा ख्वातीन समितिने तैयारकी है । इसमें घरेलू महिलाओंको सम्मिलित किया जाएगा, ताकि वे घरोंके अतिरिक्त ऐसे समारोहों, जहां महिलाएं समूहमें हों, उनसे परामर्श ले सकें ।
जो बिन्दु बनाए गए हैं, उनमें एक बारमें ‘तीन तलाक’, ‘तीन नशिस्त’में (एक-एक माहके अन्तरपर तलाक कहना) तलाक, तलाककी स्थिति आनेके कारण, ससुरालमें मायकेका हस्तक्षेप, ससुरालमें सास-ससुरकी सेवाका दबाव, संयुक्त कुटुम्बके कारण परिजनोंमें दूरियां, व सम्पत्तिमें भाग मिला या नहीं, ‘निकाह-तलाक’, ‘हलाला’के विषयमें शरई सूचना है या नहीं ?, यदि है तो स्वयं प्राप्तकी या किसी मदरसे आदि में, तलाकको लेकर प्रायः आने वाले फतवों और तलाकसे सम्बन्धित विवादित घटनाओंके बारेमें क्या सोचती हैं ?, आदि प्रश्नोंके उत्तर जाने जाएंगे । यह भी पूछा जाएगा कि क्या धार्मिक लोग इसके बारेमें सही सूचनाएं दे रहे हैं ?
‘महिला शरई कोर्ट’ सर्वेक्षणके साथ महिलाओंको शरईकी जानकारी भी देगी और उनके अधिकार भी बताएगी । उन्हें प्रतिकूल परिस्थितिमें ‘महिला शरई कोर्ट’से मिलने और विवाद हल करनेका परामर्श भी दिया जाएगा ।
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
Leave a Reply