शरणागति प्रार्थना


कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ।।
अर्थ : हे नारायण ! जो भी मेरे शरीर, मन, वचन, इन्द्रिय, बुद्धि और आत्मासे सोच समझकर या अज्ञानतावश (अपनी प्रकृति अनुरूप) हो रहा है, मैं सर्वस्व आपके श्री चरणोंमें समर्पित करता हूं !



One response to “शरणागति प्रार्थना”

  1. Kiran Manikant Baxi says:

    Hari Om !

    I m very much interested in Subhashit shlokas with meaning.

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