‘यूपीए’के १० वर्षोंमें आया ७७० अरब डॉलरका अवैध धन, वित्त मन्त्रालयने विवरण देने से मना किया


जुलाई २३, २०१८

२००५-१४ के मध्यमें (यूपीए शासनके १० वर्षका कार्यकाल) कुल ७७० अरबका अवैध सम्पत्ति (कालाधन) भारतमें आया था; लेकिन वित्त मन्त्रालयने संसदकी गोपनीयता भंग होनेकी सम्भावनाके चलते इसका ब्यौरा देनेसे मना कर दिया है ।

कांग्रेस शासनने २०११ में अवैध धनका पता लगानेके लिए तीन भिन्न-भिन्न संस्थानोंसे विवरण बनानेको कहा था, जिन्होंने ३० दिसम्बर २०१३, १८ जुलाई २०१४ और २१ अगस्त २०१४ को अपना विवरण शासनको सौंप दिया था । यह तीन संस्थान दिल्ली स्थित ‘नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एण्ड पॉलिसी’, ‘नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ व फरीदाबाद स्थित ‘नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेण्ट’ हैं ।

केन्द्र शासनने इन तीनों विवरणको सार्वजनिक करनेसे पूर्ण रूपसे मधा कर दिया है । शासनने कहा है कि उसने यह विवरण गत वर्ष २१ जुलाईको संसदमें वित्त मामलोंके लिए बनी ‘स्टैंडिंग कमेटी’को सौंप दिया था । अभी यह विवरण ‘स्टैंडिंग कमेटी’के पास विचाराधीन है, जिसके कारण इसके बारेमें किसी प्रकारकी सूचना नहीं दी जा सकती है; यद्यपि अमेरिका स्थित ‘ग्लोबल फाइनेंशियल इण्टेग्रिटी’ नामक ‘थिंक टैंक’के अनुसार भारतमें २००५-१४ के मध्य लगभग ७७० अरब डॉलरका अवैध धन आया, जबकि १६५ अरब डॉलरका कालाधन देशसे बाहर गया; यद्यपि यह केवल एक आकलन है और शासनकी ओरसे इस बातकी पुष्टि नहीं की गई है ।  

‘स्विस नेशनल बैंक’की ओरसे बताया गया था कि वहांके बैंकोंमें वर्ष २०१७ में भारतीयोंके धनमें ५० प्रतिशत अर्थात लगभग दो गुणा वृद्धि हुई है । अधिकृत रूपसे वहां भारतीय लोगोंका धन लगभग ७,००० कोटि रुपये हो गया है; यद्यपि संख्या विवरण अनुसार, स्विस बैंकमें विदेशी धनमें केवल ०.०७ प्रतिशत धन ही भारतीयोंका है ।

स्विस नेशनल बैंकके अंक-विवरणमें वो धन सम्मिलित नहीं था, जो भारतीय लोगोंने अन्य देशोंमें शैल (फर्जी) उद्योग खोलकर उनके द्वारा वहां जमा कराया है । बता दें कि जांच विभागका कहना है भारतीय अपना अवैध धन दूसरे देशोंमें घुमाकर ‘मल्टीपल लेयर प्रणाली’के द्वारा स्विस बैंक तक पहुंचाते हैं ।

स्विट्जरलैण्डने भारत सहित अन्य देशोंको उनके यहांसे आने वाले धनकी अपने आप सूचना देनेका प्रारूप तैयार कर लिया है । इसके चलते अगले वर्ष से भारतको अपने देशसे आने वाले धनका विवरण  स्वतः मिलना आरम्भ हो जाएगा, जिससे अवैध धन छिपाना असम्भव हो जाएगा ।

स्विस बैंकमें ६ निष्क्रिय घोषित भारतीय खातोंमें से एक देहरादूनके बहादुरचन्द्र सिंहका है, जबकि दो खातेदारों पियरे वाचक व बर्नेट रोजमैरीका मुम्बईका बताया गया है । अन्य तीनमें पेरिस निवासी चिकित्सक मोहनलाल, लन्दन निवासी एसवाई प्रभुदास और अज्ञात पते वाले किशोरी लाल सम्मिलित हैं ।

स्रोत : अमर उजाला



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution