मई ८, २०१९
कांग्रेसके वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूरने ‘टीपू सुल्तान’को उनकी पुण्यतिथिपर स्मरण करनेपर पाकिस्तानके प्रधानमन्त्री इमरान खानकी प्रशंसा की, जिसके पश्चात नूतन विवाद खडा हो गया है और बीजेपी सहित दक्षिणपन्थी संगठन उनके विरोधमें उतर आएं हैं ।
अपने विवादित वक्तव्यके चलते पार्टीको कठिनाईमें डालनेवाले थरूरने मंगलवार, ७ मईको कहा कि ‘व्यक्तिगत रूपसे इमरान खानके बारेमें एक बात मुझे ज्ञात है कि भारतीय उपमहाद्वीपके साझा इतिहासमें उनकी रुचि वास्तविक और दूरगामी है । उन्होंने पढा; वो ध्यान रखते हैं । यद्यपि, ये निराशाजनक है कि एक पाकिस्तानी नेताने एक महान भारतीय नायकको स्मरण करनेके लिए उनकी पुण्यतिथिको चुना ।’
उल्लेखनीय है कि शनिवार, ४ मईको पाकिस्तानके प्रधानमन्त्री इमरान खानने टीपू सुल्तानको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा था कि ‘आज ४ मईको टीपू सुल्तानकी पुण्यतिथि है । एक व्यक्ति, जिसकी मैं प्रशंसा करता हूं; क्योंकि वह स्वतन्त्रता पसंद करता है और अपना जीवन जीनेके लिए लडता है ।’
बीजेपीके वरिष्ठ प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हारावने कहा कि कांग्रेस सदैव अवसर ढूंढती रहती है कि इमरान खानकी प्रशंसा करें, टीपू सुल्तानके बारेमें इमरान खानका बोलना साम्प्रदायिक सोच है । शशि थरूरने क्यों इमरान खानके वक्तव्यका स्वागत किया है ?, कांग्रेस सदैव ध्रुवीकरणका प्रयास करती है ।
यह प्रथम बार नहीं है, जब इमरान खानने टीपू सुल्तानकी वीरताकी प्रशंसा की है । फरवरीमें पुलवामा आतंकी आक्रमणके पश्चात बढे भारत-पाकिस्तान तनावके मध्य संसदके संयुक्त बैठकमें प्रधानमन्त्रीने सुल्तानकी वीरताकी सराहना की थी ।
टीपू सुल्तानके बारेमें कहा जाता है कि टीपूने चौथे एंग्लो-मैसूर युद्धमें साहससे युद्ध लडा; परन्तु श्रीरंगपट्टनकी घेराबंदीमें मारा गया; क्योंकि फ्रांसीसी सैन्य सलाहकारोंने सुल्तानको गुप्त रास्तेसे भागनेके लिए कहा था; परन्तु टीपूका उत्तर था, ‘भेडके रूपमें एक सहस्र वर्षोंसे एक बाघके रूपमें एक दिवस जीना उत्तम है ।’
“कांग्रेसका टीपू सुल्तान और पाकिस्तानके प्रधानमन्त्रीके प्रति बार-बार उमडता प्रेम और दूसरी ओर कांग्रेस शासित राज्योंमें महाराण प्रतापको महान भी न बताना, यह उनकी साम्प्रदायिक सोचको ही दिखाता है और किसप्रकार कांग्रेस वोटका ध्रुवीकरण करती है, इसका बोध होता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : रिपब्लिक वर्ल्ड
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