शास्त्र वचन
अन्नाद भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः ।
यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः ।।
अर्थ : सारे प्राणी अन्नपर आश्रित हैं, जो वर्षासे उत्पन्न होता है । वर्षा यज्ञ सम्पन्न करनेसे होती है और यज्ञ नियत कर्मोंसे उत्पन्न होता है । ऐसे प्रसादयुक्त अन्नसे जीवमें अशुद्धियां नहीं आती हैं ।
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