शास्त्र वचन


पुत्र इव पितु र्गेहे विषये यस्य मानवाः।
निर्भया विचरिष्यन्ति स राजा राजसत्तमः॥
अर्थ : पुत्र जैसे पिताके घरपर निर्भय होता है, वैसे ही जिस राज्यके लोग निर्भय होकर विचरते (घूमते) हैं, वह राजा श्रेष्ठ राजा होता है ।


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