शास्त्र वचन


अप्रमत्तश्च यो राजा सर्वज्ञो विजितेन्द्रियः ।
कृतज्ञो धर्मशीलश्च स राजा तिष्ठते चिरम् ॥
अर्थ : जो राजा अप्रमत्त, सर्वज्ञ, जितेन्द्रिय, कृतज्ञ और धार्मिक है, वह लम्बे कार्यकालतक राज्य करता है ।


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