शास्त्र वचन


वाग्दण्डं  प्रथमं  कुर्यात्  धिग्दण्डं तदनन्तरम् ।
तृतीयं   धनदण्डं   तु   वधदण्डमतः   परम् ॥
अर्थ : राजाको पहले वाग्दण्ड करना, उसके पश्चात धिक्-दण्ड,  तत्पश्चात धन-दण्ड और अन्तमें ‘वध-दण्ड’ देना चाहिए ।


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