उत्तमानेव सेवेत प्राप्तकाले तु मध्यमान् ।
अधमांस्तु न सेवेत य इच्छेद् भूतिमात्मनः ॥
अर्थ : देवगुरु दत्तात्रेय कहते हैं : जो अपनी ऐश्वर्यवृद्धि चाहता है, वह उत्तम पुरुषोंकी ही सेवा करे, समय पडनेपर मध्यम पुरुषोंकी भी सेवा कर ले; परन्तु अधम पुरुषोंकी सेवा कदापि न करे ।
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