शास्त्र वचन


मोहाद्राजा स्वराष्ट्रं यः कर्षयत्यनवेक्षया ।
सोऽचिराद्भ्रश्यते राज्याज्जीविताच्च सबान्धवः ।। 
अर्थ : जो राजा मोहसे, अविचारसे अपने राज्यको दुर्बल करता है, वह राज्यसे और बन्धुसहित जीनेसे पूर्व ही शीघ्र नष्ट-भ्रष्ट हो जाता है ।


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