शास्त्र वचन


पापंप्रज्ञानाशयतिक्रियमाणंपुनःपुनः। 
नष्टप्रज्ञःपापमेवनित्यमारभतेनरः॥ – विदुर नीति
अर्थ : बार-बार क्रियमाणद्वारा पाप करनेसे मनुष्यकी विवेकबुद्धि नष्ट हो जाती है और जिसकी विवेकबुद्धि नष्ट हो चुकी हो, ऐसे व्यक्तिसे सदैव पापकर्म होते हैं ।


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