अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते । जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।।
अर्थ : रावणके युद्धमें परास्त कर उसका वध कर , प्रभु श्री रामने माता सीताको मुक्त किए और विभीषणको लंकाकी राजगद्दीपर आसीन किए । उनके भाई लक्ष्मणने उनसे लंकामें कुछ और दिवस रुकनेके लिए कहा; क्योंकि लंका अत्यधिक रमणीय स्थान था। तब प्रभु श्री रामने कहा कि स्वर्णमयी और सुंदर लंकामें उन्हें आकृष्ट नहीं करती और उन्हें अपने जन्मभूमि वापिस जाना है; क्योंकि जननी और जन्मभूमि दोनोंका ही स्थान स्वर्गसे भी श्रेष्ठ है !
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