शास्त्र वचन


विदेशेषु धनं विद्या व्यसनेषु धनं मति:
परलोके धनं धर्म: शीलं सर्वत्र वै धनम् ||
अर्थ : परदेसमें विद्या ही धन होता है | विपत्तिमें विवेक धन होता है और परलोकमें धर्म ही धन होता है और आदर्श वर्तन अर्थात अच्छा चरित्र सर्वकाल एवं सर्वत्र धन समान होता है |



One response to “शास्त्र वचन”

  1. Kadar says:

    Thanks for shiarng. Always good to find a real expert.

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