भारतीय संस्कृतिकी प्रत्येक धर्माचरणकी कृतिके पीछे सूक्ष्म अध्यात्म शास्त्रीय कारण है, जिसे साधनाके तपोबलसे समझा जा सकता है । अपनेसे आयुमें श्रेष्ठको उठकर प्रणाम करनेसे क्या लाभ होता है ?, यह मनुस्मृतिके इस श्लोकसे ज्ञात होगा ।
ऊर्ध्वम् प्राणा ह्युत क्रामन्ति यूनः स्थविर् आयति ।
प्रत्युत्था नाभिवदभ्याम् पुनस्तान्प्रतिपद्यते ।। – मनुस्मृति
महर्षि मनु अनुज या शिष्यको उठकर पूज्यजनोंको प्रणाम करनेका सूक्ष्म कारण बताते हुए कहते हैं कि युवा जनोंका प्राण वयोवृद्धके आनेपर ऊपरकी उछलता है; अतः उन्हें खडे होकर प्रणाम करनेसे प्राण (शक्ति) अपनी स्वाभाविक स्थितिमें आ जाते हैं; फलस्वरूप वे अपनेको सन्तुलित अनुभाव करने लगते हैं ।
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