मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत् ।
मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्ये चाsपि नियोजयेत् ।। – चाणक्य नीति
अर्थ : मनमें जो भी चिंतन किया है उसे मुखसे बाहर नहीं निकालना चाहिए। उसपर मनन चिंतन कर उसे गुप्त रखना चाहिए और उस विचारको बिना घोषित किए क्रियान्वित करना चाहिए ।
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