धर्मादर्थः प्रभवति धर्मात् प्रभवते सुखं । धर्मेण लभते सर्वं धर्मसारमिदं जगत् ।।
– वाल्मिकि रामायण, अरण्यकाण्ड ९:३०
अर्थ : धर्मसे ही धन मिलता है और धर्मसे ही सुख मिलता है । अधिक क्या धर्मसे ही सब कुछ मिल जाता है; अतः इस विश्वमें धर्म ही सार-सर्वस्व ग्राह्य वस्तु है ।