न जातु कामान्न भयान्न लोभात् धर्मं त्यजेज्जीवितस्यापि हेतो: |
नित्यो धर्म: सुखदु:खे त्वनित्ये नित्यो जीवो धातुरस्य त्वनित्य: || – महाभारत
अर्थ : इच्छा पूर्ति हेतु, भय, लोभ या प्राण जानेके भयसे धर्मका परित्याग नहीं करना चाहिए; क्योंकि धर्म ही शाश्वत है और सुख -दु:ख क्षणिक हैं, स्थूल देह नश्वर है और आत्मा शाश्वत है |
Leave a Reply