दुर्जनोंकी संगत क्यों न करें ?


अहो दुर्जनसंसर्गात् मानहानिः पदे पदे ।
पावको लोहसंगेन मुद्रगरैरभिताद्यते ।। 

अर्थ : दुर्जनोंका संगत करनेवालेको बार-बार अपमान सहन करना  पडता है, जैसे लोहेके संग करनेवाले स्वर्णको बार-बार पीटा जाता है ।



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