इच्छाकी गांठ


अङ्गं गलितं पलितं मुन्डं दशनविहीनं जातं तुन्डम् ।
वृद्धो यति गृहीत्वा दन्डं तदापि न मुञ्चत्याशापिन्डम् ॥   
अर्थ : शरीर झुक गया है, सिरके केश श्वेत हो गया है, मुंहमें दांत नहीं, वृद्ध होनेपर व्यक्ति लाठीके सहारे चलता है; परंतु इच्छाकी गांठको ढीला नहीं कर पाता है |



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