मन वाणीसे किये गए शुभ या अशुभ कर्म


शुभाशुभंफलं कर्म मनोवाग्देह संभवं ।

कर्मजा गतयो नृणामुत्तमाधममध्यमा ।। – मनुस्मृति ( 12:3 )

अर्थ : मनुष्य अपने मन वाणीसे जो भी शुभ या अशुभ कर्म करते हैं , तदनुसार वे उत्तम, मध्यम या निम्न योनिको प्राप्त होते हैं !



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