पापी अपना अन्त स्वयं करता है


आज के पापियों द्वारा किए जा रहे कुकर्मोंको देखकर कुछ व्यक्ति कहते हैं कि उन्हें दण्ड क्यों नहीं मिल रहा है, वे फल फूल क्यों रहे हैं, इस सम्बन्धमें ‘मनुस्मृति’में यह श्लोक पठनीय है –
नाधर्मश्चरितो लोके सद्य: फलति गौरिव ।शनैराववर्त्यमानस्तु कर्तुर्मुलानि कृतन्ति ।। – मनुस्मृति  अर्थ : पापी व्यक्तिद्वारा किया गया पाप धरतीमें बोए गए बीज समान, उसी समय अंकुरित नहीं होता; परन्तु समय आनेपर वह इस भलीभांति फलता-फूलता है और पापको उसकी जड सहित उखाड फेंकता है ।
भावार्थ : व्यभिचारी, भ्रष्टाचारी और दुराचारी व्यक्तिका अन्त निश्चित ही होता है । वे अपने सर्वनाशकी पूर्व तैयारी स्वयं करते हैं, मात्र प्रत्येक घटनाक्रम प्रकृतिके नियम अनुसार अपना समय लेती है अर्थात उनके पापका घडा भरनेपर उनका सर्वनाश और धर्मकी जीत अवश्य होती है जब दुर्जनोंके ऊपर ईश्वरकी कुल्हाडी चलती है तो उनका नाश अवश्य होता है और इतिहास इस बातका साक्षी है ।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution