वैदिक सनातन संस्कृतिकी श्रेष्ठता
मरणान्तानि वैराणि निवॄत्तं न: प्रयोजनम् ।क्रीयतामस्य संस्कारो ममापेष्य यथा तव ।।
अर्थ : “शत्रुके मृत्युके पश्चात उससे शत्रुता समाप्त हो जाती है। अब वह जितना तुम्हारा है उतना ही मेरा भी है अतः उसका योग्य प्रकारसे अंतेयष्टि संस्कार करो” – ये शब्द प्रभु श्रीरामने विभीषणको रावणके मृत्युके पश्चात तब कहे, जब वह अपने भ्राताके अंतेयष्टि करनेसे झिझक रहे थे । यह हमारी संस्कृति है।
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