सत्य


नास्ति सत्यात् परो धर्मो नानृतात् पातकं परम् ।

अतः सर्वेषू कार्येषु सत्यमेव विशिष्यते ।।                   

अर्थ : ‘सत्यसे बढकर धर्म और असत्यसे बढकर दूसरा कोई पाप नहीं है’; अतः सभी कार्योंमें सत्यको ही श्रेष्ठ माना गया है ।



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