क्षणश: कणश्चैव विद्याम् अर्थं च साधयेत् ।
क्षणे नष्टे कुतो विद्या , कणे नष्टे कुतो धनम् ।।
अर्थ : मनुष्यने प्रत्येक क्षण सीखना चाहिए और प्रत्येक कण अर्जन करना चाहिए । यदि एक क्षण भी व्यर्थ किया तो विद्या कैसे प्राप्त होगी और एक कण भी नष्ट किया तो धन कैसे प्राप्त होगा !
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