अपने देशका सुख


 तादृग्जायते सौख्यमपि स्वर्गे शरीरिणाम् । दारिद्रयेऽपि हि यादृक् स्यात्स्वदेशे स्वपुरे गृहे ॥  पंचतंत्र                                  

अर्थ – शरीरधारियोंको ऐसा सुख स्वर्गमें भी नहीं मिलता, जैसा कि दरिद्र होनेपर भी अपने देश, ग्राम और घरमे मिलता है।



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