‘प्लाज्माके लिए भेजा सम्पर्क क्रमाङ्क, मिले गुप्ताङ्गके चित्र; प्रत्येक मिनिट ३-४ भ्रमणभाष, मुम्बईकी महिलाने व्यक्त की वेदना


२२ अप्रैल, २०२१
      ‘कोरोना’कालमें सहायताकी मांग करनेपर संवेदनहीनता उजागर हुई है । घटना मुंबईकी एक महिला शास्वती सिवाकी है । महिलाने एक परिजनको ‘कोविड-१९’ होनेके पश्चात अपना चलभाष क्रमाङ्क सार्वजनिक किया था, जिससे ‘प्लाज्मा’ उपचार हेतु रक्त मिल सके; परन्तु उसके क्रमाङ्कपर अनेक लोगोंने लज्जाप्रद चित्र भेजे ! महिलाने ‘वाइस’में एक लेखके माध्यमसे अपना अनुभव साझा किया है ।  गत सप्ताह उनके परिवारका एक सदस्य ‘कोरोना पॉजिटिव’ हो गया था । इसके पश्चात वह ‘वेंटिलेटरकी खोजमें थीं, उन्होंने ‘ट्विटर’पर सहायताकी पुकार लगाई । कुछ अच्छे लोग मिले तथा ६  घण्टेके अन्दर ‘वेंटिलेटर’ उपलब्ध भी हो गया । इसके २ दिवस पश्चात ‘ऐ+’ रक्त गुट ‘प्लाज्मा’की आवश्यकता पडी । उनके एक मित्रने अन्य उपाय न सूझते देख उनका भ्रमणभाष सामाजिक जलस्थलपर सार्वजनिक कर दिया । महिला आगे लिखती है कि उन्हें अपना क्रमाङ्क सार्वजनिक हुआ देखकर भय भी लगा; किन्तु परिजनकी प्राणरक्षा हेतु उन्हे यह उपाय करना पडा ।
    इसके पश्चात उनके पास प्रत्येक क्षण ३-४ भ्रमणभाष आने लगे । एकने भ्रमणभाषपर कहा कि तुम्हारी ‘प्रोफाइल पिक्चर’ बहुत अच्छी है । उन्होंने उन क्रमाङ्कोंको अवरुद्ध किया । दूसरे दिवस प्रातःकाल एक मिनिटके अन्तरालमें ही ७ लोगोंके भ्रमणभाष आए । सभीको  अवरुद्ध करके शास्वतीने भ्रमणभाष मौन करके निकट ही रख दिया; परन्तु जब उन्होंने ‘व्हाट्सएप्प’ देखा तो वहां लज्जाप्रद चित्र भरे पडे थे । अनेक अपरिचितोंने उन्हें लज्जाप्रद चित्र भेज रखे थे । उन्होंने महिलाओंको परामर्श दिया है कि वे कभी अपना सम्पर्क क्रमाङ्क सार्वजनिक न करें ।
     मैकाले शिक्षण पद्धति व आजके संस्कारहीन समाज व धर्महीन परिवारोंसे निकले लोगोंका यह व्यवहार अनुचित है । ऐसे निकृष्ट लोगोंका विनाश आगामी धर्मराज्यसे पूर्व स्वत: ही हो जाएगा, जिसके पश्चात नूतन पीढी निर्मित होंगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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