एक आनन्दकी बात बताती हूं, ‘उपासना’के नूतन उपक्रम, ‘सूक्ष्म इन्द्रियोंको कैसे जागृत करें’, इस प्रक्रिया सीखने हेतु कुछ विनम्र शिक्षकगण जिज्ञासा दिखाने लगे हैं और वे इस दिशामें प्रयास भी करने लगे हैं, जो बहुत अच्छा संकेत हैं । यदि आजका शिक्षक वर्ग धर्मनिष्ठ हो जाए तो अगली सात्त्विक पीढीका निर्माण सरलतासे होने लगेगा ।
Leave a Reply