प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्धदेहं
सर्गस्थितिप्रलयकारणमादिदेवम् ।
विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोभिरामं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥
अर्थ : उन गिरीशको (शिव) मैं प्रातः नमन करती हूं, जिनके अर्ध भागमें देवी गिरिजा (पार्वती) विराजती हैं, जो उत्पत्ति, स्थिति और लय तीनोंके मूल कारण हैं जो विश्वेश्वर हैं और सम्पूर्ण विश्वको अपने मनोरमतासे जीत लेते हैं, जो अपने औषधिसे सांसरिक बंधन रूपी रोगका नाश करते हैं और अद्वितीय हैं ।
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