रोहिणी न्यायालयमें न्यायाधीशके सामने ‘गैंगस्टर’ जितेंद्र गोगीकी गोली मारकर हत्या, अधिवक्ता (वकील) बन घुसे दोनों आक्रमणकारी भी ‘ढेर’


२४ सितम्बर, २०२१
       राजधानी देहलीमें २४ सितम्बरको सबके सामने रोहिणी न्यायालय परिसरमें ‘फायरिंग’से उथल-पुथल मच गई । इससे पूर्व कि कोई कुछ समझ पाता कि हुआ क्या है ? न्यायालयमें दो ‘बदमाशोें’ने अन्धाधुन्ध ‘फायरिंग’कर कुख्यात ‘बदमाश’ जितेंद्र मान अर्थात गोगीकी हत्या कर दी । घटनाके समय उसे न्यायलय कक्षमें उपस्थितिके (पेशीके) लिए लाया गया था । प्रत्युत्तरमें कार्यवाही करते हुए देहली ‘पुलिस’ने भी गोली चलाई, जिसमें दोनों आक्रमणकारियोंकी भी घटनास्थलपर ही मृत्यु हो गई । प्रतिवेदनके (रिपोर्टके) अनुसार, ‘पुलिस’ने तीनों शवाेंको अपने अधिकारमें लेकर अन्त्यपरीक्षणके (पोस्टमार्टमके) लिए भेज दिया है और घटनाकी जांच कर रही है ।
       ‘पुलिस’के सूत्रोंकी ओरसे यह प्रतिवाद (दावा) किया जा रहा है कि गोगी समूहके मुखिया जितेंद्र गोगीपर यह आक्रमण कभी उसका मित्र रहा और अब उसका विरोधी सुनील मान अर्थात टिल्लू ताजपुरिया समूहके दो आक्रमणकारियोंने किया है । टिल्लू समूहकी गोगीके साथ शत्रुता बहुत पुरानी बताई जाती है ।
       उल्लेखनीय है कि जितेंद्र गोगीकी उपस्थिति एएसजे गगन दीप सिंहके न्यायालयमें हो रही थी, तभी न्यायालय कक्षमें उपस्थितिके मध्य ‘गैंगस्‍टर’पर आक्रमण होनेसे उथल-पुथल मच गई । इसपर देहली ‘पुलिस’के आयुक्‍त राकेश अस्‍थानाने कहा कि यह ‘गैंगवार’ नहीं है; अपितु आक्रमण है; यद्यपि, ‘पुलिस’ने प्रत्युत्तरमें कार्रवाई करते हुए दोनों आक्रमणकारियोंको ‘ढेर’ कर दिया है । आक्रमणकारियोंको ‘ढेर’ करनेवाले प्रत्येक ‘पुलिसकर्मियों’को ५०-५० सहस्र (हजार) रुपए, पुरस्कार स्वरूप देनेकी घोषणा भी ‘पुलिस’ आयुक्तके द्वारा की गई है ।
       ‘रोहिणी न्यायालय बार एसोसिएशन’के पूर्व सचिव सत्यनारायण शर्माने ‘मीडिया’को बताया कि अधिवक्ताका परिधान पहनकर आए ‘बदमाशों’ने न्यायालय कक्षमें न्यायाधीशके सामने गोली मारी । इतिहासमें कदाचित प्रथम ऐसी घटना है । इस घटनाके पश्चात न्यायालय कक्षमें अधिवक्ताके परिधानमें ‘बदमाशों’के पहुंचनेसे सुरक्षा व्‍यवस्‍थापर प्रश्न भी उठ रहे हैं ।
     न्यायालय परिसरमें हुई इस घटनासे स्पष्ट है कि अपराधियोंके साहसमें कितनी वृद्धि हुई है । उधर, ‘पुलिस’ने प्रत्युत्तर देते हुए जो कार्यवाई की है, उसके लिए वह अभिनन्दनके पात्र है; किन्तु जब न्यायालयतक सुरक्षित नहीं है, तो सामान्य जनमानसकी कौन कहे ? जब न्याय व्यवस्था स्वयंकी रक्षा नहीं कर सके, उस व्यवस्थाको परिवर्तित करनेकी आवश्यकता है और यह हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे ही सम्भव है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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