श्रीगुरु उवाच


आज अनेक जन, धन लेकर कार्य करते हैं, ऐसा अनेक मतदाताओंके साथ होता है । वे धन देनेवालेको मत देते हैं । मतदाताओंको लोभवश धन देनेवाले चुनकर आते है और राज्य करते हैं । इससे तथाकथित लोकतन्त्रकी दशा दयनीय हुई है । इसपर उपाय एक और वह है हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना कर, उसे सर्वस्वका त्याग करनेवालेके हाथोंमें देना । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले 

साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)



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