श्रीगुरु उवाच


श्राद्ध परिपूर्ण करना आवश्यक
सासको पूरनपोळी (महाराष्ट्रमें खाई जानेवाली एक प्रकारकी मीठी रोटी) रुचिकर थी; इसलिए बहूने सासके श्राद्धपर प्रातः ९ बजे पूरनपोळी बनाकर मुंडेरपर रखी । मध्याह्न ४ बजेतक उसे कौआ छूने नहीं आया । तत्पश्चात उसे स्मरण हुआ कि सासू मांको पूरनपोळीपर घी रुचिकर लगता था; इसलिए जैसे ही उसने पूरनपोळीपर घी परोसा, उसी क्षण कौवेने उसे छू लिया । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)


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