श्रीगुरु उवाच


प्रत्येक पीढी आनेवाली अपनी अगली पीढीसे समाज, राष्ट्र और धर्मके सन्दर्भमें आशा रखती है । इसके स्थानपर प्रत्येक पीढीको ऐसा विचारकर कार्य करना चाहिए कि हम जो कुछ भी कर सकते हैं, वह सब हमें करना चाहिए, जिससे हमारी अगली पीढीको उसके सन्दर्भमें कुछ करनेकी आवश्यकता शेष न रहनेसे वह पूरा समय साधनाके लिए दे सकेगी ।- परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)


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