श्रीगुरु उवाच


सकाम प्रार्थनासे महत्त्वपूर्ण साधना !
इसके कारण निम्नलिखित हैं –
१. प्रार्थनासे प्रारब्ध शून्य नहीं होता, मात्र साधनासे होता है ।
२. प्रार्थनामें स्वेच्छा होती है तथा साधनासे स्वेच्छाका नाश करना होता है ।
‘साधना योग्य हो’, ऐसी प्रार्थना करनेकी अपेक्षा वह समय साधनाको देना, उदा. नामजप अथवा सेवाके लिए देना, महत्त्वपूर्ण है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)


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