श्रीगुरु उवाच


विवाह उपरान्त ससुराल जानेपर कन्याओंके मनपर थोडा तनाव रहता है; क्योंकि ससुरालके व्यक्ति, वहांकी कार्यपद्धति इत्यादि, सब उसके लिए नूतन होता है । तनाव न लगे, इस हेतु जैसे किसी कार्यालयमें चाकरी (नौकरी) लगनेपर हम वहांकी सब पद्धति ज्ञात करते हैं, उसी प्रकार ससुराल जाकर वहांकी कार्यपद्धति ज्ञात करनी है, ऐसा दृष्टिकोण रखनेपर उन्हें तनाव नहीं होगा । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था

साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)



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