श्रीगुरु उवाच


हिन्दू धर्मपरिवर्तन ईश्वरप्राप्ति हेतु नहीं करते हैं अपितु वे आर्थिक सुख-सुविधाओंकी प्राप्ति हेतु करते हैं । ऐसे लोगोंका हिन्दुधर्ममें न होना ही उचित है ।



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