श्रीगुरु उवाच


कक्षमें अकेले रहनेके स्थानपर अन्योंके साथ निवास करनेका लाभ
जब कोई साधक आश्रममें प्रथम निवास हेतु आता है, तो उसे अन्योंके साथ रहनेके लिए कहनेपर कष्टप्रद लगता है । उसे यह ज्ञात होना चाहिए कि प्रीति निर्माण करनेका सर्वाधिक सुलभ मार्ग अर्थात सबके साथ एक कक्षमें निवास करना । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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