श्रीगुरु उवाच


निर्गुण ईश्ववरीय तत्त्वसे एकरूप होनेपर ही खरी शान्ति अनुभव कर पाते हैं; ऐसा होते हुए भी शासनकर्ता जनताको साधना न सिखाकर ऊपरी तौरपर मानसिक स्तरके उपचार करते हैं, जैसे जनताकी समस्याएं दूर करनेके लिए ऊपरी प्रयास करना, मनोचिकित्सालय स्थापित करना । परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था   



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