श्रीगुरू उवाच


निस्वार्थी धर्माभिमानी ही कर सकते हैं आदर्श राष्ट्रकी स्थापना
‘येन-केन-प्रकारेण’ अर्थात कुछ भी कर चुनाव जीतना, इतना ही स्वार्थी राजनीतिज्ञोंका ध्येय होता है; अतः वे आदर्श राज्यकी स्थापना नहीं कर सकते हैं । इसके विपरीत हिन्दू राष्ट्रकी अर्थात आदर्श धर्मराज्यकी स्थापना करना, यह धर्माभिमानका ध्येय होता है; इसलिए वे ही हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना कर सकते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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