सन्तोंद्वारा एक ही प्रश्नके भिन्न-भिन्न उत्तर देनेके कारण


सन्तोंद्वारा एक ही प्रश्नका भिन्न-भिन्न व्यक्तियोंको भिन्न-भिन्न उत्तर अथवा एक ही व्यक्तिको भिन्न-भिन्न समयपर भिन्न-भिन्न उत्तर देनेके कारण –
कभी-कभी सन्त एक ही प्रश्नका उत्तर एकको कुछ देते हैं तो, दूसरेको कुछ और देते हैं । कभी एक ही व्यक्तिको भिन्न-भिन्न समयपर एक ही प्रश्नका भिन्न-भिन्न उत्तर देते हैं । ऐसा क्यों ? यह प्रश्न कुछ लोगोंको होता है और कुछ लोगोंको सन्तोंके विषयमें विकल्प भी निर्माण होता है । सन्तोंद्वारा भिन्न-भिन्न उत्तर देनेके कारण निम्नलिखित हैं –  
१. प्रश्नकर्ताकी मानसिक स्थिति अनुसार सन्त भिन्न-भिन्न उत्तर देते हैं ।
२. प्रश्नकर्ताके आध्यात्मिक स्तरके अनुसार उत्तर ग्रहण करनेकी क्षमता भिन्न-भिन्न होती है । उस क्षमता अनुसार सन्त भिन्न-भिन्न उत्तर देते हैं ।
३. कभी प्रश्नकर्ताद्वारा प्रारब्ध भोग भोगना उसके हितमें हो तो प्रारब्ध टालनेके उपाय न बताते हुए ‘सब कुछ ठीक होगा’ ऐसा कहते हैं ।
४. कभी कालानुसार उत्तर परिवर्तित करते हैं, उदा. सम्पतकालमें तथा आपातकालमें उत्तर भिन्न-भिन्न होते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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