सनातन संस्थाद्वारा उल्लेखित ‘गुरुकृपायोग’का महत्त्व !


पूर्वके युगोंमें व्यक्ति सात्त्विक होनेसे प्रकृति अनुसार किसी भी साधनामार्गसे साधना कर सकता था । कलियुगमें व्यक्तिमें अनन्त स्वभावदोष होनेसे उन्हें दूर किए बिना, साधना करना असम्भव है; इसलिए सनातन संस्थाद्वारा बताए गए ‘गुरुकृपायोग’में स्वभावदोष एवं अहम् निर्मूलनको प्राधान्य दिया गया है । इनका निर्मूलन करनेके कारण ही सनातनके साधकोंकी शीघ्र प्रगति होती है ।



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