हिन्दू राष्ट्रप्रेमियों ! आगे हिन्दू राष्ट्र कौन सम्भालेगा ? इसकी चिन्ता न करें !


स्वातन्त्र्योत्तर कालमें अर्थात् पिछले ६६ वर्षोंमें स्वभाषा, हिन्दू संस्कृति, हिन्दू धर्म इत्यादि विषयोंपर  बालकोंपर संस्कार न हों तथा बडोंके संस्कार नष्ट हों, इस हेतु सभी राजकीय पक्षोंने प्रबल प्रयत्न किए हैं । इस कारण अनेक बालकोंको अपनी मातृभाषा भी ठीक प्रकारसे नहीं आती । इतना ही नहीं, मातृभाषाके स्थानपर अंग्रेजी आती है, इसका उन्हें अभिमान होता है । कॉन्वेंट विद्यालयोंमें शिक्षण लेनेके कारण उन्हें हिन्दू संस्कृतिका तथा धर्मका प्राथमिक ज्ञान भी नहीं है । यह बालक बडे होकर अपने बच्चोंको माता-पिताके स्थानपर ‘मम्मी-डैडी’के संस्कार देंगे । इसप्रकार आनेवाली दो पीढियोंमें हिन्दू राष्ट्र चलाने योग्य कोई नहीं रहेगा । ऐसी स्थितिमें ख्रिस्ताब्द २०२३ में हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना होनेपर उसे आदर्श पद्धतिसे चलाएगा कौन ? ऐसी चिन्ता कुछ हिन्दुत्ववादियोंको होती है । बाह्यतः ऐसी सोच उचित है ।                                                                        प्रत्यक्षमें ईश्वरका नियोजन ध्यानमें आनेके पश्चात इसकी चिन्ता नहीं होगी । अभी हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाका कार्य करनेवाले आगे ३० वर्ष हिन्दू राष्ट्र चलाएंगे । उसके पश्चात क्या ? तो इसका उत्तर है, हिन्दू राष्ट्र चलानेके लिए अनेक जीवात्मा उच्चलोकसे पृथ्वीपर जन्म ले रही हैं । इसका उदाहरण सनातन संस्थाके संदर्भमें देखें । पिछले ४-५ वर्षोंमें १५-१६ वर्षीय कुछ कन्याएं पूर्णकालिक साधिकाएं बन, रामनाथी आश्रममें आईं । आश्रममें मात्र ३ से ६ वर्ष रहनेपर उन्होंने ६० % से अधिक आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया; अतः अब वे १८ से २२ वर्षीय साधिकाएं विविध आश्रम भी सम्भाल  रही हैं । इसीप्रकार आगे जाकर वे राज्यस्तरीय उत्तरदायित्व भी सम्भालेंगी । इस अनुभवसे उन्हें १५ से २० वर्ष पश्चात प्रथम राज्य तथा तत्पश्चात राष्ट्र चलाना सहज सम्भव होगा ।  इनके पीछे-पीछे १०-१२ वर्षीय बालक तथा १ माहसे लेकर ३-४ वर्षीय बच्चे भी उच्चलोकसे जन्म लेकर रामनाथी आश्रममें आए हैं । २५-३० वर्ष पश्चात वे भी हिन्दू राष्ट्र चलानेमें सक्षम होंगे । इसका कारण यह है कि उच्चलोकसे पृथ्वीपर जन्म लेनेके कारण उनका भगवान श्रीकृष्णसे सतत् अनुसन्धान रहता है । इस कारण उन्हें योग्य-अयोग्यका ज्ञान अन्तःकरणसे तत्काल हो जाता है । उच्च आध्यात्मिक स्तरके कारण उनकी वाणीमें चैतन्य है । इसका प्रभाव अन्य लोगोंपर होनेके कारण वे उन्हें भी हिन्दू राष्ट्र चलानेमें सक्षम करेंगे । इसप्रकार आगे १००० वर्ष अस्तित्वमें रहनेवाले हिन्दू राष्ट्रकी नींव पक्की होनेवाली है । –  परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था



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