श्रीगुरू उवाच


किसी विषयके सन्दर्भमें पाश्चात्य विचारधारा तथा सनातनी विचारधारामें भेद हो, तो सनातनी विचारधाराको सत्य समझें । इसका कारण यह है कि सनातनी विचारधारा अनेक लक्ष वर्षोंसे है । उदा. सूर्यस्नान कब करें ?, इसका समय पाश्चात्य प्रातः १० बजेके पश्चात बताते हैं, तो हिन्दू धर्ममें प्रातःकालकी मध्यम किरणें अर्थात प्रात: ९ बजेके पूर्वका समय बताया गया है । उसीप्रकार सनातनी विचारधारामें कभी परिवर्तन नहीं होता, तो पाश्चात्य विचारधारा कुछ वर्षोंमें परिवर्तित हो जाती है, उदा. वैज्ञानिक नूतन सिद्धान्त बताते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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