श्रीगुरू उवाच


राजकीय पक्षोंके कार्यकर्ताओंको अपने स्वार्थ हेतु उनके पक्षका शासन हो, यह अपेक्षा होती है तो साधकोंको सभीका हित हो, इस हेतु ईश्वरीय (धर्म) राज्यकी अपेक्षा होती है ।



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