मायाके विषयमें सूक्ष्म संबंधी ज्ञान निरर्थक है !


कुछ व्यक्ति वृक्ष, पक्षी और पशु क्या बोलते हैं यह मात्र समझ ही नहीं सकते तथापि निर्जीव वस्तु भी क्या बोलते है यह भी समझ सकते हैं । सम्पूर्ण जीवन ऐसे व्यक्ति ऐसे कृतियोंमें व्यस्त रहते हैं।  यह एक प्रकारकी सिद्धि होती है। आत्मसाक्षात्कारकी अपेक्षा, मायाके संबंधमें ऐसे स्थूल विषयोंके बारे जानना व्यर्थ है और मायाके संबंधमें सूक्ष्मको जानना भी व्यर्थ है  –

परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले



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