अंग्रेजीमें कहते हैं, ‘People get government they deserve’, अर्थात प्रजाकी योग्यता जैसी होती है, उसे वैसे ही राज्यकर्ता मिलते हैं । यह बात भारतमें पूर्णरूपेण लागू होती है । सत्ययुगमें प्रजा सात्त्विक थी; अतः राजाकी आवश्यकता नहीं थी । त्रेतायुगमें प्रजाको श्रीराम जैसे राजा मिले । द्वापरयुगमें सत्त्व-रज प्रधान प्रजा होनेसे कुछ काल दुर्योधन तो कुछ काल युधिष्ठिर राजा हुए ।
कलियुगमें प्रजा रज -तम प्रधान है; इसलिए उसे भ्रष्ट, गुण्डे, बलात्कारी, राष्ट्रद्रोही एवं धर्मद्रोही राज्यकर्ता मिल रहे हैं ।
इसका उपाय केवल यह है कि प्रजाको धर्मशिक्षण देकर धर्माचरणी बनाना !!
हिन्दू राष्ट्रमें बालवाडीसे पदव्युत्तर शिक्षणतक धर्मशिक्षण अनिवार्य होगा ! प्राचीन कालमें ‘यथा राजा तथा प्रजा’, यह तथ्य सत्य था, अर्थात जैसा राजा वैसी प्रजा; परन्तु कलियुगमें लोकराज्य (प्रजातन्त्र) होनेके कारण, जैसी प्रजा वैसा राजा यही सत्य है । – परात्पर गुरु डॉ . जयन्त आठवले
Satya hai guruji