‘पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू, योगऋषि रामदेवबाबा, श्री श्री रविशंकर इत्यादिके नामोंसे उनके सम्प्रदाय पहचाने जाते हैं; किन्तु सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति मेरे नामसे नहीं जाने जाते, इसके विपरीत उनके नामके कारण मेरे नामकी समाजमें पहचान है ! – परात्पर गुरु परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (१६.१.२०१४)
भावार्थ : सनातन संस्था एवं हिन्दू जन जागृति समिति, ये संप्रदाय नहीं अपितु धर्मशिक्षण देनेवाली एवं धर्मरक्षण करनेवाली दो संस्थाएं हैं | इतना ही नहीं इन संस्थाओंमें जुडे सदस्योंको व्यक्तिनिष्ठ नहीं अपितु तत्त्वनिष्ठ बनाया जाता है, जिससे समाज धर्म एवं अध्यात्मके सिद्धांतोंको आत्मसात कर योग्य दिशामें साधना करते हुए धर्मपथपर अग्रसर होता है |
-तनुजा ठाकुर
Leave a Reply