श्रीगुरु उवाच


अध्यात्मका अधिकारी कौन ?
जो सर्व प्रथम साधकके पदको सिद्ध करता है और उसके पश्चात शिष्य, वही अध्यात्मका अधिकारी बन सकता है अर्थात् उसे ही आत्मतत्त्वके विषयमें अनुभूति मिल सकता है | – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले

 



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