श्रीगुरु उवाच


हिन्दुत्त्ववादियो, कार्य कितना हुआ इसकी अपेक्षा कितना शेष है इसपर विचार करें !

अन्य हिंदुत्ववादीसे मिलनेपर स्वत: क्या किया है, यह न बताते हुए आगे सभी एकत्रित होकर क्या कर सकते हैं इसपर विचार करें ! तभी भेंट करना परिणामकरक होगा | क्या किया, यह बतानेसे अहम् भाव बढता है, जबकि एकत्रित होकर आगे कार्यके सन्दर्भमें विचार करनेपर एक दूसरेसे निकटता बढती है, और कार्यके विषयमें अहम् भाव निर्माण नहीं होता है परिणामस्वरुप ईश्वरका आशीर्वाद प्राप्त होता है | – परात्पर गुरु डॉ. जयंत अठावले  (७.५.२०१४)



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