श्रीगुरू उवाच


जिसकी उत्पत्ति है, उसकी स्थिति है तथा उसका लय भी होता है । हिन्दू धर्मकी उत्पत्ति कभी नहीं हुई; अतः वह अनादि है, चिरन्तन है । इसके विपरीत अन्य सभी धर्मोंकी (प्रत्यक्षमें वे पन्थ हैं) उत्पत्ति हुई है; अतः उनका लय, नाश निश्चित है । वह काल अब निकट आ रहा है ।



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